महाशिवरात्रि पर खुलेगा सोमेश्वर धाम, रायसेन दुर्ग में उमड़ेगा श्रद्धा का सैलाब


लाखों लोगों की आस्था का केंद्र: रायसेन अजेय दुर्ग स्थित सोमेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर लगेगा विशाल मेला

रायसेन। मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक रायसेन दुर्ग पर स्थित प्राचीन सोमेश्वर धाम शिव मंदिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी यहां विशाल मेले का आयोजन होगा, जिसमें रायसेन सहित आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं मंदिर के पट

लगभग 12वीं सदी में निर्मित इस प्राचीन शिव मंदिर के पट वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही खोले जाते हैं। प्रातःकाल जब उगते सूर्य की किरणें मंदिर पर पड़ती हैं, तो पूरा मंदिर स्वर्णिम आभा से आलोकित हो उठता है। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।

सुबह से ही भक्तों का आगमन प्रारंभ हो जाता है। प्राचीन शिवलिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारें लगती हैं। मंदिर परिसर में स्थापित भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की मूर्तियां इसकी समृद्ध स्थापत्य परंपरा और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं।

स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण

सोमेश्वर धाम का यह मंदिर ऊंचे चबूतरे पर निर्मित है। इसमें गर्भगृह, खंभों पर आधारित मंडप, लंबा दालान तथा प्रवेश के लिए भव्य दयोढ़ी है। दयोढ़ी को चार वर्गाकार स्तंभ सहारा देते हैं, जिन पर सुंदर ज्यामितीय नक्काशी की गई है।

मंडप का आयताकार ढांचा 32 वर्गाकार स्तंभों पर टिका है। प्रवेश द्वार के ऊपर मध्य भाग में भगवान गणेश की प्रतिमा उकेरी गई है। मंदिर के बाहर लगे शिलालेख की लिपि देवनागरी और भाषा संस्कृत है, जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण देती है।

1974 के आंदोलन के बाद खुले मंदिर के ताले

आजादी के बाद दुर्ग पुरातत्व विभाग के अधीन आने पर सुरक्षा कारणों से मंदिर में प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। वर्ष 1974 में स्थानीय नागरिकों और संगठनों द्वारा आंदोलन किया गया। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी स्वयं दुर्ग पहुंचे और मंदिर के ताले खुलवाए। तभी से महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेले की परंपरा प्रारंभ हुई।

वर्तमान में भी वर्ष में एक बार महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रशासन और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।


देश के महत्वपूर्ण दुर्गों में होती है गणना

समुद्र तल से लगभग 594 मीटर की ऊंचाई पर विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की दुर्गम पहाड़ी पर स्थित रायसेन दुर्ग को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है। लगभग पांच किलोमीटर लंबी विशाल चारदीवारी और चट्टानी संरचना इसे ऐतिहासिक रूप से अजेय बनाती थी।

करीब 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस दुर्ग में बारादरी, कचहरी, धोबी महल और बादल महल प्रमुख संरचनाएं हैं। किले तक पहुंचने के लिए तीन मार्ग हैं तथा सुरक्षा की दृष्टि से 13 चौकियां स्थापित थीं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, शुद्ध पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं।

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