बिरसा/बालाघाट (डिजिटल डेस्क): दमोह-दोषिटोला-शेरपार मार्ग पर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एवं गौरक्षकों की सक्रियता से संदिग्ध मवेशी परिवहन का मामला सामने आया है। रविवार, 23 अगस्त 2026 को गौरक्षकों की सूचना पर 112 पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मवेशियों को कब्जे में लिया और कार्रवाई शुरू की।
पर्चियों में मिली असमानता, पुलिस को दी सूचना
जानकारी के अनुसार, दमोह बाजार से 5 जोड़ी (10 नग) बैलों को सड़क मार्ग से पैदल हांकते हुए धुराटोला लांजी की ओर ले जाया जा रहा था। दोषिटोला-शेरपार मार्ग पर गौरक्षकों ने मवेशी ले जा रहे व्यक्तियों को रोककर पूछताछ की। मवेशी हांकने वालों ने बताया कि ठेकेदार मानकर के कहने पर वे इन बैलों को लांजी ले जा रहे हैं।
गौरक्षकों द्वारा बैलों से संबंधित रसीदों (पर्चियों) की जांच करने पर बेचने वाले, खरीदने वाले और परिवहन का आदेश देने वाले व्यक्तियों के दर्ज विवरण में भारी असमानता पाई गई। मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर गौरक्षकों ने तत्काल डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने शुरू की जांच, बेचने वाले को बुलाया
सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल दोषिटोला-शेरपार मार्ग पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मवेशी बेचने वाले व्यक्ति को मौके पर बुलाकर पूछताछ की और अग्रिम कार्रवाई तक मवेशियों को सुपुर्दगी में लिया।
मवेशी व्यापार और अवैध वसूली पर उठ रहे गंभीर सवाल
बिरसा तहसील के मलाजखंड और बिरसा थाना क्षेत्र में बैल व बोदा की खरीद-फरोख्त को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लोग खुद को व्यापारी बताकर किसानों से मवेशी खरीदते हैं। वहीं, इस व्यापार की आड़ में आए दिन अवैध वसूली, मारपीट और विवाद की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
प्रशासनिक जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की टीमें क्षेत्र में गौवंश के संदिग्ध परिवहन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय नागरिकों और गौरक्षकों की मांग है कि प्रशासन मवेशी परिवहन के सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करे।
इससे जहां एक तरफ वैध पशु व्यापार करने वाले किसानों व व्यापारियों को अकारण परेशानी न हो, वहीं दूसरी ओर अवैध गौ-तस्करी में लिप्त लोगों पर गौवंश प्रतिषेध अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।


