70वें जन्म महोत्सव की स्मृतियों को संजोने के लिए प्रकाशित स्मारिका, संत-महापुरुषों की उपस्थिति में हुआ लोकार्पण
उत्तर प्रदेश के पावन नैमिषारण्य तीर्थ स्थित श्री राजराजेश्वरी मंदिर शक्तिपीठ, स्कंदाश्रम में आयोजित द्वितीय वार्षिक महोत्सव, श्री शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के शुभ अवसर पर “उनकी पुनीत यात्रा” नामक पावन स्मारिका का विमोचन किया गया। यह स्मारिका परम पूज्य सदगुरुदेव स्वामीजी महाराज हीरापुर वालों के 70वें जन्म महोत्सव की स्मृतियों को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।
मंगलवार 10 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में परम पूज्य सदगुरुदेव स्वामीजी महाराज सहित कथा व्यास ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज, स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज, भागवत भास्कर शैलेंद्र शास्त्री, कथा प्रवक्ता कृष्णकांत शास्त्री तथा शिव कृष्ण शास्त्री सहित अनेक संत-महापुरुषों के कर कमलों से स्मारिका का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण भी उपस्थित रहे।
70 बिंदुओं में संजोई गई जीवन यात्रा
स्मारिका में पूज्य गुरुदेव स्वामीजी महाराज की आध्यात्मिक जीवन यात्रा को 70 प्रमुख बिंदुओं में प्रस्तुत किया गया है। इन बिंदुओं को “मणि रत्न मालिका” के रूप में संकलित किया गया है, जो स्वयं सदगुरुदेव के श्रीमुख से प्रकट आध्यात्मिक अनुभूतियों पर आधारित हैं। यह मणि रत्न मालिका इस स्मारिका का प्रमुख आकर्षण है, जो साधकों और भक्तों को आध्यात्मिक मार्ग पर प्रेरणा देने का कार्य करेगी। विशेष रूप से मां नर्मदा से संबंधित अनुभूतियों को इसमें विशेष स्थान दिया गया है।
संतों के संदेश और भक्तों के अनुभव शामिल
स्मारिका में सदगुरुदेव से जुड़े संत-महापुरुषों के आशीर्वाद और मंगलकामना संदेश भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े भक्तों और जनप्रतिनिधियों के शुभकामना संदेश तथा गुरुदेव के प्रति उनकी भावनाओं को भी स्थान दिया गया है।
इसके अलावा गुरुदेव के शिष्य-भक्त परिवार के 100 से अधिक गुरु भाइयों के भक्तानुभव भी इसमें संकलित हैं, जिनके माध्यम से गुरुदेव की करुणा, वात्सल्य और भक्तों के प्रति उनकी आत्मीयता का भाव स्पष्ट रूप से सामने आता है।
जीवन यात्रा के 70 छायाचित्र भी शामिल
इस स्मारिका में गुरुदेव के जीवन से जुड़े प्रारंभिक काल से लेकर वर्तमान तक के 70 महत्वपूर्ण छायाचित्र भी प्रकाशित किए गए हैं। साथ ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों के चित्र भी इसमें संकलित किए गए हैं, जो इन पावन आयोजनों की स्मृतियों को जीवंत करते हैं।
इस स्मारिका के माध्यम से श्रद्धालुओं और भक्तों को परम पूज्य सदगुरुदेव स्वामीजी महाराज हीरापुर वालों की आध्यात्मिक जीवन यात्रा, साधना और उनके प्रेरणादायी कार्यों को निकट से जानने का अवसर प्राप्त होगा।
