नई दिल्ली
देश के बड़े शहरों में सस्ती और तेज यात्रा का विकल्प बन चुकी बाइक टैक्सी सेवाएं अब कानूनी विवाद में घिरती नजर आ रही हैं। परिवहन विभाग ने बिना परमिट चल रही बाइक टैक्सियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे Rapido, Ola और Uber जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दरअसल विवाद की जड़ यह है कि इन सेवाओं में बड़ी संख्या में ऐसी मोटरसाइकिलें इस्तेमाल हो रही हैं जिनका पंजीकरण निजी उपयोग (व्हाइट नंबर प्लेट) के लिए है, जबकि नियमों के अनुसार किसी भी वाहन का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए कमर्शियल परमिट और पीली नंबर प्लेट होना जरूरी है।
नियम क्या कहते हैं
परिवहन विभाग के अनुसार यदि कोई वाहन यात्रियों से किराया लेकर चलाया जा रहा है तो उसे कमर्शियल कैटेगरी में पंजीकृत होना चाहिए। इसके साथ ही बीमा, परमिट और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन भी अनिवार्य है। बिना इन औपचारिकताओं के बाइक टैक्सी चलाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
सरकार और अदालत का रुख
हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालयों ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखाया है। अदालतों ने कहा है कि जब तक राज्य सरकारें बाइक टैक्सी के संचालन के लिए स्पष्ट एग्रीगेटर नीति नहीं बनातीं, तब तक बिना परमिट ऐसी सेवाओं को वैध नहीं माना जा सकता।
कार्रवाई और जुर्माना
कई शहरों में परिवहन विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाली बाइक टैक्सियों पर कार्रवाई की जा रही है।
कई वाहनों को जब्त किया गया है।
चालकों पर लगभग 5,000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।
एग्रीगेटर कंपनियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐप से गैर-व्यावसायिक वाहनों को हटाएं।
चालकों और यात्रियों पर असर
इस कार्रवाई का असर हजारों बाइक चालकों की आय पर पड़ रहा है। वहीं यात्रियों को भी पीक ऑवर्स में सस्ते विकल्प कम होने के कारण ऑटो और कैब के ज्यादा किराए का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द स्पष्ट नीति बनानी चाहिए ताकि नियमों का पालन भी हो और रोजगार के अवसर भी बने रहें।
प्रशासन का तर्क
परिवहन विभाग का कहना है कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा, बीमा और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

