घुवारा (जनपद पंचायत बड़ामलहरा)
एक ओर सरकार गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर लापरवाही और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। जनपद पंचायत बड़ामलहरा की ग्राम पंचायत सिजवाहा में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित गौशाला के संचालन पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीण मोहन अहिरवार और विजय सिंह बुंदेला का आरोप है कि मजरा ओबरी में बनी गौशाला कागजों में संचालित दिख रही है, लेकिन वास्तविकता में वहां मात्र 8–10 गाय ही मौजूद हैं। जबकि दस्तावेजों में सैकड़ों गोवंश की टैगिंग दर्शाई गई है। ग्रामीणों के अनुसार, चारे और रख-रखाव के नाम पर मिलने वाली शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
गौशाला का संचालन राधा रानी स्व-सहायता समूह ओबरी को सौंपा गया है, जिसकी अध्यक्ष जसोदा यादव और सचिव कल्पना यादव हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संचालन में पारदर्शिता नहीं है और मजदूरों के नाम पर भी फर्जी बिलों के जरिए राशि निकाले जाने की शिकायतें की गई हैं।
शिकायतें, पर कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक वर्ष में कई बार लिखित शिकायतें जनपद पंचायत के अधिकारियों को दी गईं, जिनमें साक्ष्य भी संलग्न थे। इसके बावजूद अब तक न तो कोई ठोस जांच टीम गांव पहुंची और न ही संचालन से संबंधित कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने आई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में गोवंश खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे किसानों की फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसान रात भर खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं।
इनका कहना है -
इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ ओम नमः शिवाय अरजरिया ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जनपद सीईओ को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
गौशाला के संचालन की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यदि अनियमितता प्रमाणित हो तो समूह का अनुबंध निरस्त किया जाए।
संचालन किसी पारदर्शी स्थानीय समिति या सामाजिक संस्था को सौंपा जाए।
सड़कों पर घूम रहे गोवंश को तत्काल रेस्क्यू कर गौशाला में शिफ्ट किया जाए।
अब देखना यह है कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या गौशाला वास्तव में अपने उद्देश्य—गोवंश संरक्षण और किसानों की फसल सुरक्षा—को पूरा कर पाएगी या नहीं।
