नरवाई जलाने पर रोक की मुहिम तेज, किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा गया

कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव में संगोष्ठी, पराली प्रबंधन के लाभकारी उपायों की दी गई जानकारी

संवाददाता किशोरी श्रीवास 

छतरपुर। किसान कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत प्रभारी कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नमः शिवाय अरजरिया के निर्देशन में मुख्यमंत्री नरवाई प्रबंधन योजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, नौगांव में कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष (नरवाई/पराली) जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना और इसके बेहतर प्रबंधन के तरीके बताना था।

संगोष्ठी में किसानों को बताया गया कि नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी की उर्वरता घटती है और जल धारण क्षमता कम हो जाती है। साथ ही मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव एवं केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।

कृषि विज्ञान केंद्र नौगांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. राजीव सिंह ने नरवाई जलाने के दुष्परिणामों पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि “पुषा डीकंपोजर” जैसी जैविक तकनीकों के उपयोग से नरवाई को आसानी से खाद में बदला जा सकता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।

उपयंत्री अभिषेक जैन ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी देते हुए बताया कि सुपर सीडर, हैपी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, रीपर कम बाइंडर और बेलर जैसे उपकरणों से नरवाई का खेत में ही प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। इन तकनीकों से लागत कम होती है और उत्पादन क्षमता बढ़ती है।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और नरवाई प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्राप्त की।

 

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