बालाघाट/ समस्याएं अक्सर रास्ता रोकती हैं, लेकिन कुछ लोग इन्हीं समस्याओं में नया रास्ता खोज लेते हैं। ऐसा ही उदाहरण जिला चिकित्सालय बालाघाट की केंटीन ने पेश किया है, जहां रसोई गैस की कमी के बीच सेवा को जारी रखने के लिए एक अभिनव पहल की गई।
जिला चिकित्सालय बालाघाट की केंटीन में गैस सिलेंडर की लगातार समस्या के चलते कई बार संचालन प्रभावित हुआ। हालात ऐसे बने कि केंटीन को 4-5 दिनों तक बंद रखना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली परेशानी को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप एवं सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन की सलाह पर केंटीन संचालक ने हार मानने के बजाय समाधान खोजने का निर्णय लिया।
विकल्प बना समाधान
केंटीन संचालक ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में लकड़ी की भट्टी तैयार कर ली। इस भट्टी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें कम से कम धुआं निकलता है, जिससे पर्यावरण पर भी न्यूनतम प्रभाव पड़ता है। लकड़ी आसानी से उपलब्ध होने के कारण अब केंटीन का संचालन पहले से अधिक सुचारु हो गया है। साथ ही, गैस सिलेंडर की तुलना में खर्च भी कम आ रहा है, जिससे आर्थिक बचत भी हो रही है। केंटीन संचालन में हर माह लगभग 25 कमर्सियल गैस सिलेण्डर की खपत होती थी, लेकिन अब लकडी की भट्टी का उपयोग करने से उससे कम खर्च में काम चल रहा है और बचत भी हो रही है।
मरीजों को बड़ी राहत
जिला अस्पताल में दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह केंटीन बेहद महत्वपूर्ण सुविधा है। केंटीन के दोबारा नियमित रूप से शुरू होने से उन्हें समय पर भोजन और चाय-नाश्ता उपलब्ध हो पा रहा है।
दूसरों के लिए बनी मिसाल
एक्सेंट कंसल्टिंग एंड केटरिंग सर्विस प्राइवेट लिमिटेड भोपाल द्वारा संचालित इस केंटीन ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय रूकना नहीं, बल्कि समस्यास का समाधान करने विकल्प तलाशना जरूरी है। केंटीन संचालक की यह पहल अब अन्य होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो गैस की समस्या के दौरान वैकल्पिक ईंधन अपनाकर अपने व्यवसाय को निरंतर चला सकते हैं। यह कहानी बताती है कि चुनौतियां चाहे कितनी भी बड़ी हों, यदि सोच सकारात्मक हो तो हर समस्या का समाधान संभव है।
