भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के मानद प्रतिनिधि ने देशवासियों से संयमित और संवेदनशील होली मनाने का किया आग्रह
करेली। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि भागीरथ तिवारी ने होली के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। साथ ही उन्होंने अपील की कि त्योहार मनाते समय संवेदनशील, संयमित और जिम्मेदार आचरण अपनाया जाए।
उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है। ऐसे पावन पर्व पर यह सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि हमारे उत्सव का उल्लास किसी भी जीव-जंतु के लिए पीड़ा का कारण न बने।
रासायनिक रंग पशुओं के लिए हानिकारक
भागीरथ तिवारी ने बोर्ड के पत्र का हवाला देते हुए बताया कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सचिव डॉ. एस. के. दत्ता ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि विगत वर्षों में कुछ लोग कुत्तों, गायों, बिल्लियों और अन्य बेसहारा पशुओं पर जबरन रंग डाल देते हैं। इसे मनोरंजन का हिस्सा समझा जाता है, जबकि यह पशुओं के लिए अत्यंत कष्टदायक होता है।
उन्होंने बताया कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश रंगों में कृत्रिम रसायन और डाई मिले होते हैं, जो जानवरों की त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। पशुओं की त्वचा मनुष्यों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है, जिससे उन्हें खुजली, जलन, एलर्जी, चकत्ते या संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि रंग आंखों में चला जाए तो सूजन, जलन और दृष्टि संबंधी परेशानी हो सकती है। कई बार पशु घबराकर भागने लगते हैं और दुर्घटना का शिकार भी हो सकते हैं। रंग चाटने से उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
तेज शोर भी बनता है कारण
उन्होंने कहा कि होली के दौरान अत्यधिक शोर-शराबा, तेज हॉर्न और भीड़ भी पशुओं में भय और तनाव पैदा करते हैं। पशु ध्वनि के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। घबराहट की स्थिति में वे अनियंत्रित होकर दौड़ सकते हैं और घायल हो सकते हैं।
कानून का प्रावधान
भागीरथ तिवारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी पशु को अनावश्यक कष्ट पहुंचाना दंडनीय अपराध है। Prevention of Cruelty to Animals Act के तहत पशुओं के साथ क्रूरता करने पर दंड का प्रावधान है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(ग) के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखे। अतः यह केवल नैतिक ही नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।
नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
होली आपसी सहमति और सुरक्षित, प्राकृतिक रंगों के साथ ही खेलें।
पानी के गुब्बारे या पिचकारी जानवरों की ओर न चलाएं।
अनावश्यक तेज हॉर्न से बचें।
यदि किसी पशु पर रंग लग जाए तो उसे जोर से न रगड़ें, स्वच्छ पानी से धीरे-धीरे साफ करें।
पशुओं के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था रखें।
बच्चों और युवाओं को पशुओं के प्रति दयालु व्यवहार की प्रेरणा दें।
भागीरथ तिवारी ने नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं पशुओं के साथ दुर्व्यवहार होता दिखाई दे तो तुरंत स्थानीय प्रशासन या पुलिस को सूचित करें।
अंत में उन्होंने कहा,
“होली का सच्चा रंग करुणा और जिम्मेदारी में है। आइए, इस बार ऐसी होली मनाएं जिससे किसी भी मूक प्राणी को कष्ट न पहुंचे।”
