लालबर्रा/बालाघाट।
विकास के बड़े दावों के बीच ग्राम पंचायत मिरेगांव के ग्रामीण इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। गर्मी शुरू होने से पहले ही गांव के कुएं और हैंडपंप सूख चुके हैं। परेशान ग्रामीण मंगलवार, 24 फरवरी को जिला मुख्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में कलेक्टर को शिकायत सौंपकर समस्या के समाधान की मांग की।
80 कुएं और हैंडपंप सूखे
करीब 2000 की आबादी वाले इस गांव में लगभग 80 कुएं और 4 हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। बाकी जलस्रोत भी सूखने की कगार पर हैं। पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। गांव के अधिकांश लोग किसान और मजदूर हैं, जिनका जीवन खेती और पशुपालन पर निर्भर है।
करोड़ों की नलजल योजना बनी शो-पीस
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव में करोड़ों रुपये की लागत से पानी की टंकी बनाई गई, पाइपलाइन डाली गई और घर-घर कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन आज तक नियमित पानी नहीं मिला। पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग पिछले एक महीने से काम करने का दावा कर रहे हैं, मगर हालात जस के तस हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजना कागजों में चल रही है, जमीन पर नहीं।
सांसद से भी लगाई गुहार
ग्रामीणों ने क्षेत्र की सांसद भारती पारधी से भी मुलाकात कर समस्या बताई। आश्वासन मिला है, लेकिन अब गांव वालों को कार्रवाई का इंतजार है। उनका कहना है कि अगर जल्द जलापूर्ति शुरू नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।
