इंदौर, 19 फरवरी 2026।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग क्रमांक-एक, इंदौर द्वारा चिकित्सकीय लापरवाही के एक प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है। आयोग ने शिकायतकर्ता श्रीमती शांताबाई पति मांगीलाल के पक्ष में निर्णय देते हुए चिकित्सक डॉ. विजय सोनी को सेवा में गंभीर कमी का दोषी ठहराया है।
मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष विकास राय, सदस्य कुंदन सिंह चौहान एवं डॉ. निधि बारंगे की पीठ द्वारा की गई। आदेश सदस्य कुंदन सिंह चौहान द्वारा पारित किया गया।
शिकायतकर्ता श्रीमती शांताबाई को 17 मार्च 2015 को गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या के चलते Bombay Hospital Indore में भर्ती कराया गया था। 18 मार्च 2015 को डॉ. विजय सोनी द्वारा उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद भी उन्हें लगातार पेट दर्द की शिकायत बनी रही। बाद में कराई गई सोनोग्राफी एवं एक्स-रे जांच में यह तथ्य सामने आया कि शल्य चिकित्सा के दौरान प्रयुक्त धातु का उपकरण उनके शरीर के अंदर ही छूट गया था।
आयोग के समक्ष प्रस्तुत मेडिकल अभिलेखों, जांच रिपोर्टों एवं साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट पाया गया कि चिकित्सक द्वारा शल्य चिकित्सा के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे शिकायतकर्ता को पुनः उपचार कराना पड़ा तथा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत सेवा में गंभीर कमी माना है।
आयोग ने चिकित्सक डॉ. विजय सोनी को निर्देशित किया है कि वे शिकायतकर्ता को कुल 5,00,000 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करें। इसके अतिरिक्त मानसिक कष्ट के लिए 50 हजार रुपये एवं परिवाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये देने के भी निर्देश दिए गए हैं। आदेश दिनांक से 45 दिवस के भीतर राशि का भुगतान करना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान न किए जाने की स्थिति में नियमानुसार ब्याज भी देय होगा।
यह आदेश चिकित्सकीय उत्तरदायित्व और उपभोक्ता अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
