जब शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है, तो तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ने लगता है। इसे संतुलित करने के लिए शरीर को अधिक पानी की जरूरत होती है। कोशिकाएं दिमाग को संकेत देती हैं कि शरीर को और पानी चाहिए, इसलिए बार-बार प्यास लगती है।
दूसरा कारण भारी और तैलीय भोजन है। ज्यादा तेल, मसाले या प्रोटीन वाला खाना पचाने में शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में भी शरीर को अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि बाहर का भोजन करने के बाद पेट भारी महसूस होता है और प्यास ज्यादा लगती है।
घर पर भी यदि पूड़ी, पकौड़े या अन्य तली-भुनी चीजें खाई जाएं, तो दिनभर प्यास लगना और भारीपन महसूस होना सामान्य है।
ऐसी स्थिति में केवल सादा पानी ही नहीं, बल्कि छाछ का सेवन भी लाभकारी हो सकता है। छाछ पाचन में मदद करती है और शरीर को ठंडक प्रदान करती है। संतुलित और कम नमक-तेल वाला भोजन सेहत के लिए बेहतर माना जाता है।
