बालाघाट/लांजी। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लांजी क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने वर्ष 2020 से 2026 तक आयोजित सभी यूपीएससी परीक्षाओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है।
| पूर्व विधायक किशोर समरीते |
पूर्व विधायक ने 16 मार्च 2026 को लिखे अपने पत्र में आरोप लगाया है कि यूपीएससी की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में दिए जाने वाले अंकों के बीच कई मामलों में संदिग्ध अंतर दिखाई देता है। उनका कहना है कि कई अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में कम अंक मिलने के बावजूद साक्षात्कार में अत्यधिक अंक दिए गए, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
समरीते ने पत्र में कहा कि इस प्रकार की विसंगतियां योग्य और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय कर सकती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वर्ष 2020 से 2026 के बीच आयोजित यूपीएससी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और छात्रों के मन में व्याप्त संदेह दूर हो।
उन्होंने यह भी कहा कि यूपीएससी देश की सबसे प्रतिष्ठित संवैधानिक संस्थाओं में से एक है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इसलिए पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने के लिए मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए किशोर समरीते ने अपने पत्र की प्रतिलिपि संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, यूपीएससी के सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रमुख सचिव और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के निदेशक को भी भेजी है।
पूर्व विधायक ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी, जिससे यूपीएससी की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा कायम रह सके।
