अदालत ने यह निर्णय 9 मार्च 2026 को सुनाया। मामले में आरोप लगाया गया था कि चुनाव के दौरान नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र में उम्मीदवार द्वारा आवश्यक जानकारी पूरी तरह उजागर नहीं की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवार द्वारा मतदाताओं को सही और पूर्ण जानकारी देना आवश्यक है। यदि शपथ पत्र में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया जाता है तो यह चुनाव की पारदर्शिता को प्रभावित करता है। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित उम्मीदवार का निर्वाचन निरस्त करने का आदेश दिया।
विजयपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव में संबंधित उम्मीदवार को विजयी घोषित किया गया था। परिणाम के बाद चुनाव में पराजित प्रत्याशी रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर परिणाम को चुनौती दी थी।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए चुनाव परिणाम को निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित घोषित करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह फैसला चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को भी रेखांकित करता है।
