भोपाल। राजधानी में सोशल मीडिया के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और वैमनस्यता फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पुलिस आयुक्त, नगरीय पुलिस भोपाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 (पूर्व में IPC की धारा 144) के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।
पोस्ट से ज्यादा 'कमेंट्स' पर नजर
प्रशासन का मानना है कि अक्सर मूल पोस्ट उतनी घातक नहीं होती, जितने उस पर आने वाले कमेंट्स और क्रॉस-कमेंट्स होते हैं। इंटरनेट पर बिना किसी जिम्मेदारी के की जाने वाली द्वेषपूर्ण टिप्पणियां और अश्लील शब्दों का प्रयोग धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहा है। इसी 'सोशल मीडिया वॉर' को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आदेश के मुख्य बिंदु:
आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक: किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के विरुद्ध भड़काऊ पोस्ट, फोटो या वीडियो साझा करना प्रतिबंधित है।
कमेंट्स की जिम्मेदारी: पोस्ट करने वाले के साथ-साथ, उस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों और ग्रुप एडमिन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लोक शांति की सुरक्षा: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है ताकि शहर की सामाजिक शांति और लोक व्यवस्था बनी रहे।
निगरानी सेल सक्रिय:
भोपाल पुलिस की साइबर सेल और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम 24/7 सक्रिय रहकर हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रख रही है।
पुलिस आयुक्त का संदेश:
"इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ वैमनस्य फैलाना नहीं है। जन सुरक्षा और शांति सर्वोपरि है। धारा 163 का उल्लंघन करने वालों पर बिना किसी रियायत के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
सावधान रहें: सोशल मीडिया पर किसी भी ऐसी चर्चा का हिस्सा न बनें जो विवाद का रूप ले सकती हो। आपकी एक गलत टिप्पणी आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकती है।
