नैनागिरी में शिक्षा का महाकुंभ: जैन शिक्षा समृद्धि के 13वें स्थापना दिवस पर उमड़ा ज्ञान, संस्कार और संकल्प का सैलाब


विनोद कुमार जैन 
वकस्वाहा संवाददाता 

वकस्वाहा । श्री 1008 दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिरी जी की पावन वादियों में शिक्षा, संस्कार और संगठन का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब जैन शिक्षा समृद्धि का 13वां स्थापना दिवस समारोह भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। देशभर से आए पदाधिकारियों, शिक्षाविदों और बुंदेलखंड अंचल के करीब 15 विद्यालयों के प्रतिनिधियों सहित 450 से अधिक लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को एक “शैक्षिक महाकुंभ” का रूप दे दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण की मधुर स्वर लहरियों के बीच हुआ, जिसने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। राष्ट्रीय मंत्री जवाहरलाल जैन ने प्रस्तावना रखते हुए संस्था की उपलब्धियों और उद्देश्यपूर्ण यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद विभिन्न विद्यालयों की शिक्षिकाओं ने मंच संभालते हुए अपने नवाचार, उपलब्धियां और प्रशिक्षण से मिले अनुभव साझा किए, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा।

प्राचार्य सुरेंद्र भगवा और नवाचार शिक्षा शोधकर्ता संजय जैन ने अपने प्रेरक उद्बोधनों में शिक्षकों को बदलते दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार अपनाने का संदेश दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार जैन ने अपने संबोधन में जैन शिक्षा समृद्धि की भावी दिशा को स्पष्ट करते हुए शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

द्वितीय सत्र में परंपरा और गरिमा का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। ध्वजारोहण, मंच उद्घाटन, चित्र अनावरण, कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन जैसे सभी अनुष्ठान पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ संपन्न हुए। स्वागताध्यक्ष प्रशांत ग्रुप के संचालक प्रशांत जैन "निमानी" ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

कार्यक्रम के दौरान पीपीटी प्रस्तुतियों, नृत्य-नाटिकाओं और नाट्य मंचन ने शिक्षा के साथ संस्कारों की प्रभावी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिभा ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बीटीआरआईटी सागर से आए तरुण जैन और दिल्ली से पधारे संस्थापक सदस्य एवं शिक्षाविद् सुगुन चंद्र जैन ने अपने उद्बोधनों में परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण को सफलता की कुंजी बताया। वहीं मनोज बंगेला द्वारा संस्था की वार्षिक स्मारिका एवं कैलेंडर का विमोचन किया गया, जो संस्था की उपलब्धियों का दस्तावेज बनकर सामने आया।

समारोह का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि कई नए विद्यालय संचालकों ने संस्था से जुड़ने की इच्छा जताई, जिन्हें मंच से सम्मानपूर्वक स्वीकृति दी गई। इससे जैन शिक्षा समृद्धि के विस्तार को नई गति मिलने के संकेत स्पष्ट दिखे।

इस अवसर पर श्रीमंत सेठ सुरेश चंद्र जैन (सागर), सुभाष जैन (गाडरवाड़ा), डॉ. पूरन चंद्र जैन, महेंद्र कुमार जैन, सुशील कुमार जैन , उमेश पटवारी, सुमत प्रकाश जैन और सत्येंद्र जैन सहित सागर, टीकमगढ़, छतरपुर व दमोह जिलों से आए गणमान्यजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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