आवश्यकता अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की स्थापना भी की जाएगी।
यह जानकारी कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं प्रदूषण नियंत्रण विषयक समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में नमामि गंगे अभियान के तहत प्रदूषण नियंत्रण एवं अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
कलेक्टर ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ CETP की आवश्यकता, केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता तथा उद्योगों की भागीदारी के विषय में संवाद किया।
पालदा और कुमेड़ी क्षेत्र में CETP की जरूरत
बैठक में बताया गया कि पालदा और कुमेड़ी क्षेत्र में लगभग 700 छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं, जहां सीईटीपी की अत्यंत आवश्यकता है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों में शीघ्र सीईटीपी स्थापित की जाए। आवश्यकता पड़ने पर टैंकरों के माध्यम से अपशिष्ट जल को सीईटीपी तक पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
66 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना
पालदा और कुमेड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित नए CETP की अनुमानित लागत 66 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि उद्योगों को वहन करनी होगी। उद्योगों की वित्तीय भागीदारी एवं संचालन-रखरखाव में सहयोग मिलने के बाद ही राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा परियोजना की DPR पर विचार किया जाएगा।
कलेक्टर ने उद्योग प्रतिनिधियों से पर्यावरण संरक्षण को साझा जिम्मेदारी बताते हुए सहयोग का आह्वान किया और कहा कि प्रशासन व उद्योगों के संयुक्त प्रयास से औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
