सबसे कम उम्र की लेखिका बनीं बालाघाट की बेटी माही शुक्ला “ऋषि”, 24 वर्ष की आयु में दूसरी किताब प्रकाशित
बालाघाट। जिले के लिए गर्व का विषय है कि यहां की बेटी माही शुक्ला “ऋषि” ने बेहद कम उम्र में साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है।
माही को बालाघाट जिले की सबसे कम उम्र की लेखिका होने का गौरव प्राप्त हुआ है। खास बात यह है कि उनकी पहली पुस्तक तब प्रकाशित हुई थी जब वे महज़ 16 वर्ष की थीं। इतनी कम आयु में किताब प्रकाशित होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अब मात्र 24 वर्ष की आयु में उनकी दूसरी पुस्तक भी प्रकाशित हो चुकी है, जिससे उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।
पूरे मध्यप्रदेश में सबसे कम उम्र की रजिस्टर्ड ऑथर
माही शुक्ला “ऋषि” को लेकर यह भी उल्लेखनीय है कि पूरे मध्यप्रदेश में इतनी कम उम्र में रजिस्टर्ड ऑथर बनने का रिकॉर्ड अब तक किसी और के नाम दर्ज नहीं है। यह उपलब्धि न सिर्फ बालाघाट बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।
वे कई प्रतिष्ठित काव्य मंचों की शान बन चुकी हैं और अपनी प्रभावशाली लेखनी व मंच प्रस्तुति से श्रोताओं का मन जीत रही हैं।
26 फरवरी 2026 को होगा सम्मान
माही को 26 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक नगरी ओरछा में आयोजित समारोह में प्रतिभा एवं व्यक्तित्व सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान और कम उम्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जा रहा है।
बालाघाट की बेटी ने बढ़ाया जिले का मान
माही शुक्ला “ऋषि” ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो सफलता स्वयं रास्ता बनाती है।
आज बालाघाट जिले की यह बेटी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुकी है और साहित्य जगत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है।




