स्वस्थ रहना हमारे ही हाथ में है

 लेखक ब्रजेश मिश्रा


असली जीवन वही है जो स्वस्थ रहकर जिया जाए। अगर शरीर ही ठीक नहीं रहेगा, तो पैसे, सुख और आराम किसी काम के नहीं रहेंगे।

अक्सर लोग कहते हैं कि बीमारी किस्मत से आती है, लेकिन सच यह है कि ज़्यादातर बीमारियाँ हमारी गलत आदतों से होती हैं। हम जरूरत से ज्यादा खाते हैं, उल्टा-सीधा खाते हैं, समय पर नहीं खाते। जीभ के स्वाद के लिए हम पेट पर बोझ डाल देते हैं। जब खाना ठीक से नहीं पचता, तो शरीर में गड़बड़ी शुरू हो जाती है और फिर बीमारी पैदा होती है।

कम सोना, सफाई का ध्यान न रखना, मेहनत से बचना, दिनभर बैठे रहना, नशा करना — ये सब आदतें शरीर को कमजोर बना देती हैं। बंद कमरों में रहना, धूप और ताजी हवा से दूर रहना भी सेहत के लिए खराब है।

सिर्फ शरीर ही नहीं, मन का भी असर पड़ता है। ज्यादा गुस्सा, डर, चिंता और तनाव इंसान को अंदर से कमजोर कर देते हैं। खुश रहने वाला और शांत रहने वाला व्यक्ति कम बीमार पड़ता है।
स्वस्थ रहना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस तीन 

बातों का ध्यान रखना है —
संतुलित खाना

रोज थोड़ा मेहनत या व्यायाम
पूरा आराम और नींद

जरूरत हो तो दवा ली जा सकती है, लेकिन केवल दवा से पूरी सेहत नहीं मिलती। जब तक हम अपनी आदतें नहीं बदलेंगे, तब तक बीमारी बार-बार आती रहेगी।

हमें अपने शरीर को भगवान का दिया हुआ अनमोल तोहफा समझना चाहिए। इसे साफ रखें, अच्छा खाना खाएँ, समय पर सोएँ और रोज कुछ न कुछ मेहनत जरूर करें।

थोड़ा सा नियम और थोड़ा सा संयम अपनाकर हर व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

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