एक पल में दहशत, आसमान में ज़हर और सड़क पर सन्नाट

छिंदवाड़ा के औद्योगिक क्षेत्र इमलीखेड़ा में ऐसा मंजर बना कि लोग घरों से बाहर निकल आए और फैक्ट्री इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

छिंदवाड़ा |
छिंदवाड़ा जिले के इमलीखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित अग्रवाल कंपनी में आज अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही फैक्ट्री परिसर से उठता घना और काला धुआं आसमान में फैल गया, जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा गया। धुएं की तीखी गंध के कारण आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग भी सहम गए और कई परिवारों ने एहतियातन अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लीं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही कंपनी के भीतर काम कर रहे कर्मचारियों को तुरंत बाहर निकालने की कोशिश की गई। कुछ ही मिनटों में सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया गया। दमकल की कई गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं, वहीं पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र में आवाजाही सीमित कर दी।

किस वजह से लगी आग?
समाचार लिखे जाने तक आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रारंभिक तौर पर तकनीकी खराबी या ज्वलनशील सामग्री से जुड़ी चिंगारी जैसी आशंकाएं जताई जा रही हैं, लेकिन अंतिम कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन और फायर विभाग की टीम स्थिति सामान्य होने के बाद विस्तृत जांच करेगी।

नुकसान का आकलन जारी
अब तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जो राहत की बात है। हालांकि फैक्ट्री के अंदर रखे कच्चे माल और मशीनरी को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। नुकसान का सही आकलन आग पूरी तरह बुझने और स्थल की जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।

स्थानीय लोगों में चिंता
आग से उठे धुएं को लेकर आसपास के रहवासी खासे चिंतित नजर आए। लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और फायर सेफ्टी इंतजामों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों से बचें, मौके के आसपास भीड़ न लगाएं और राहत कार्य में प्रशासन का सहयोग करें। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी लगाए जाएंगे।

मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए क्या फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की सख्त निगरानी और समय-समय पर ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए?

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