बिजली बचाने की नसीहतें मंचों से दी जाती हैं, पोस्टर छपते हैं, अभियान चलते हैं। लेकिन जब दिन के उजाले में ही स्ट्रीट लाइटें जलती दिखें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
नगर परिषद लांजी के नगरीय क्षेत्र में कई स्थानों पर दिन के समय स्ट्रीट लाइटें जलती देखी जा रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इससे न सिर्फ विद्युत ऊर्जा की अनावश्यक खपत हो रही है, बल्कि नगर परिषद पर अतिरिक्त बिजली बिल का बोझ भी बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार नगर में लगभग हर खंभे पर स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। इन्हें समय पर बंद करने की जिम्मेदारी नगर परिषद के संबंधित कर्मचारियों की है। परिषद की ओर से इसके लिए कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है, लेकिन इसके बावजूद दिन में लाइटें जलती रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
यह स्थिति तब है, जब सरकार और बिजली कंपनियां लगातार ऊर्जा संरक्षण पर जोर दे रही हैं। ऐसे में स्थानीय निकायों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब सवाल यह है कि—
क्या स्ट्रीट लाइटों के लिए ऑटोमेटिक टाइमर या सेंसर सिस्टम लगाया गया है?
यदि कर्मचारी तैनात हैं, तो निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
अतिरिक्त बिजली बिल की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
इस संबंध में नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। यदि तकनीकी समस्या है तो उसका समाधान क्या है, और यदि लापरवाही है तो उस पर क्या कार्रवाई होगी—यह स्पष्ट होना जरूरी है।
स्थानीय नागरिकों की अपेक्षा है कि ऊर्जा बचत की बात केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखे।
आपके क्षेत्र में भी क्या दिन में स्ट्रीट लाइट जलती रहती हैं?
